छत्तीसगढ़

हरेराम प्रसाद कुशवाहा पर जिला बदर की कार्रवाई

Shantanu Roy
1 Oct 2026 10:52 PM IST
हरेराम प्रसाद कुशवाहा पर जिला बदर की कार्रवाई
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Durg. दुर्ग। लंबे समय से विभिन्न आपराधिक मामलों में नाम सामने आने वाले हरेराम प्रसाद कुशवाहा के खिलाफ दुर्ग जिला प्रशासन ने जिला बदर की कार्रवाई की है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 5 के तहत आदेश जारी करते हुए हरेराम प्रसाद को दुर्ग सहित आसपास के सात जिलों की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ मारपीट, बलवा, धमकी, हत्या के प्रयास, चोरी और जुआ सहित करीब 18 प्रकरण दर्ज हैं।
जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुसार हरेराम प्रसाद को आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर दुर्ग जिला छोड़ना होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से एक वर्ष की अवधि तक वह दुर्ग के अलावा रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिले की सीमा में बिना संबंधित जिला दंडाधिकारी की अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकेगा। प्रशासन ने यह कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट, पुराने थाना रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के आधार पर की है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हरेराम प्रसाद का नाम वर्ष 1999 से अलग-अलग आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों में मारपीट, बलवा, रास्ता रोककर धमकी देने, हत्या के प्रयास, चोरी और जुआ जैसे प्रकरण शामिल हैं। पुलिस ने समय-समय पर उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की थी, लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार इसके बावजूद उसकी गतिविधियों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पुलिस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि क्षेत्र में उसके प्रभाव के कारण लोगों में भय की स्थिति बनी रहती थी। पुलिस का दावा है कि कई लोग उसके खिलाफ शिकायत करने या गवाही देने से भी कतराते थे। इसी आधार पर उसकी गतिविधियों को कानून-व्यवस्था और क्षेत्र की शांति के लिए खतरा माना गया।
वर्ष 2025 में भी हरेराम प्रसाद का नाम एक बड़े मामले में सामने आया था। सुपेला पुलिस ने उसे एक बांग्लादेशी दंपती को कथित रूप से संरक्षण देने के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार हरेराम प्रसाद करीब पांच वर्षों से ज्योति और उसके पति रासेल शेख के संपर्क में था। बताया गया कि वर्ष 2020 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद हरेराम ने दोनों को किराए का मकान उपलब्ध कराया था और बाद में उनसे हर महीने करीब तीन हजार रुपये किराया लिया जाता रहा। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया था कि जिस मकान से दंपती को पकड़ा गया था, वह मकान हरेराम के कब्जे में था। इस प्रकरण में सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 571/2025 दर्ज किया गया था।
दुर्ग प्रशासन ने पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट और आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद जिला बदर का आदेश जारी किया। प्रशासन का मानना है कि लगातार सामने आ रही आपराधिक गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े खतरे को देखते हुए यह कार्रवाई आवश्यक थी। जिला बदर की अवधि के दौरान हरेराम प्रसाद संबंधित जिलों में बिना अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जिला प्रशासन ने एक वर्ष के लिए यह प्रतिबंध लागू किया है। पुलिस को भी आदेश के पालन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आगे भी की जा सकती है।
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